नागणेच्यां माता मंदिर — नागाणा धाम
Nagnechi Mata (Nagnechiya Mata / Chakreshwari) — Kuldevi of Rathore Rajputs, Marwar
नागाणा, तहसील कल्याणपुर, जिला बालोतरा, राजस्थान
माँ नागणेच्यां माता — परिचय

माँ नागणेच्यां माता मंदिर, नागाणा, राजस्थान
माँ नागेची माता कौन हैं?
नागेची माता (Nagnechiya Mata) — जिन्हें चक्रेश्वरी, राठेश्वरी भी कहा जाता है — हिन्दू देवी का एक स्वरूप हैं। वे राठौड़ राजवंश की कुलदेवी हैं जो मारवाड़ (जोधपुर), बीकानेर और किशनगढ़ रियासतों की आराध्य देवी रही हैं।
अठारह भुजाओं वाली माँ नागेची महिषासुरमर्दिनी का स्वरूप हैं। उनका प्रतीक गरुड़/बाज है जो मारवाड़, बीकानेर और किशनगढ़ रियासतों के ध्वजों पर दिखाई देता है।
चूँकि इस देवी का निवास नीम के पेड़ के नीचे माना जाता था, अत: जोधपुर में नीम के पेड़ को विशेष सम्मान दिया जाता था और उसकी लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाता था।
मंदिर में प्रतिवर्ष माघ शुक्ल सप्तमी और भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को मेलों का आयोजन होता है। माँ को लापसी और खाजा का भोग लगाया जाता है। भक्त कुमकुम से रंगे सात धागों को राखी मानकर बाँधते हैं।
ऐतिहासिक कथा
राव धुहड़ का संकल्प (1295–1305 CE)
राव सिहा के पोते और राव अस्थान के पुत्र राव धुहड़ ने बचपन में अपने मामा से कुलदेवी के बारे में सुनकर प्रतिज्ञा की कि वे कुलदेवी की मूर्ति अवश्य स्थापित करेंगे।
कन्नौज से प्रतिमा लाना
राव धुहड़ अपने राजपुरोहित पिठड़ जी के साथ कन्नौज गए जहाँ गुरु लुम्बा ऋषि ने चक्रेश्वरी माता की मूर्ति दिखाई। देवी ने "पंखिनी" (पक्षी) के रूप में साथ आने की बात कही।
नागाणा में स्थापना — विक्रम संवत 1362
राव धुहड़ नागाणा की पहाड़ी के पास नीम के पेड़ के नीचे थकान से सो गए। कुलदेवी ने कहा अब मैं आगे नहीं जाऊंगी। माघ वदी 10, संवत 1362 (1305 ई.) में मंदिर का निर्माण किया गया।
नागेची माता का नामकरण
"चक्रेश्वरी" ने नागाणा में प्रकट होने के कारण "नागेची माता" के नाम से प्रसिद्धि पाई। नाग+नेची = नागाणा की देवी। मारवाड़ के राठौड़ वंश की कुलदेवी के रूप में पूजित।
नागेची माता की प्रसिद्ध कथा
एक बार बाल्यावस्था में राव धुहड़ जी अपने ननिहाल गए। वहाँ उन्होंने अपने मामा का बड़ा पेट देखकर हँसी उड़ाई। मामा ने क्रोध में कहा — "तुम मेरे पेट पर हँसते हो, पर दुनिया तुम्हारे परिवार पर हँसती है जिनके पास कुलदेवी ही नहीं।"
ये कड़वे शब्द राव धुहड़ के हृदय में चुभ गए। उन्होंने प्रण किया कि वे अपनी कुलदेवी की मूर्ति अवश्य लाएंगे। उन्होंने वन में जाकर कठोर तपस्या की। देवी प्रसन्न हुईं और प्रकट होकर बताया — "तुम्हारी कुलदेवी का नाम चक्रेश्वरी है और उनकी मूर्ति कन्नौज में है।"
बड़े होने पर राव धुहड़ जी अपने राजपुरोहित पिठड़ जी के साथ कन्नौज पहुँचे। वहाँ गुरु लुम्बा ऋषि ने मूर्ति दिखाई। जब मूर्ति साथ लेकर चले तो देवी ने कहा — "मैं 'पंखिनी' (पक्षी) के रूप में साथ आऊंगी, पर रास्ते में कहीं मत रुकना।"
नागाणा की पहाड़ी के पास राव धुहड़ थकान से नीम के पेड़ के नीचे सो गए। जब जागे तो देवी बोलीं — "मैंने कहा था रुकना नहीं, अब यहाँ से आगे नहीं जाऊंगी।" देवी के आदेश पर राव धुहड़ ने चार दिशाओं में घोड़ा दौड़ाया — उतनी भूमि "ओरण" बनी। देवी की मूर्ति भूमि से प्रकट होने लगी, किन्तु चरवाहे ने गायों को आवाज दी और मूर्ति कमर तक ही प्रकट हो सकी।
माघ वदी 10, संवत 1362 (1305 ई.) को राव धुहड़ ने मंदिर का निर्माण किया। चक्रेश्वरी "नागाणा में प्रकट" होने से "नागेची माता" कहलाईं।
अन्य प्रमुख नागेची माता मंदिर
जोधपुर मंदिर
मेहरानगढ़ दुर्ग में स्थित नागेची माता मंदिर — मारवाड़ रियासत का मुख्य मंदिर।
बीकानेर मंदिर
शहर से 2 किमी दक्षिण-पूर्व में — अठारह भुजाओं वाली चाँदी की प्रतिमा। rao bika द्वारा स्थापित।
जालोर / किशनगढ़ मंदिर
इन दुर्गों में भी राठौड़ राजाओं ने अपनी कुलदेवी के मंदिर बनवाए।
न्यास पंजीकरण विवरण
न्यास का नाम
माँ नागणेच्यां माता मंदिर, नागाणा एवं धार्मिक न्यास
पता
नागाणा, तहसील कल्याणपुर, जिला बालोतरा, राजस्थान
पंजीकरण
राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959 के अंतर्गत
प्रकार
धार्मिक सार्वजनिक न्यास (Religious Public Trust)
न्यास के उद्देश्य
मंदिर का रखरखाव
मंदिर परिसर का नियमित रखरखाव और संवर्धन
भक्तों की सेवा
दर्शनार्थियों हेतु सुविधाएं प्रदान करना
सामाजिक कार्य
गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता
धार्मिक आयोजन
नवरात्रि, पूर्णिमा आदि उत्सवों का आयोजन
